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पंडित अनंत देव मिश्र जी का व्यक्तित्व पारसधर्मी था:आचार्य सच्चिदानंद मिश्र

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गया जी स्थानीय डॉ. विवेकानंद मिश्र के आवास पर पंडित अनंत देव मिश्रा की14 वां पुण्यतिथि पर एक अत्यंत गरिमामयी, भावपूर्ण एवं वैचारिक संगोष्ठी का आयोजन संपन्न हुआ। इस सभा का मूल प्रयोजन भारतीय राजनीति के एक प्रखर नक्षत्र, युगदृष्टा और देवतुल्य महामना स्वर्गीय श्री अनंत देव मिश्र जी की पुण्य स्मृति पर उन्हें अपनी अंतःकरण की भावांजलि एवं श्रद्धासुमन अर्पित करना था। इस अवसर पर उपस्थित मनीषियों और विद्वतजनों ने उनके विराट व्यक्तित्व, अगाध ज्ञान और निस्वार्थ समाज सेवा को अत्यंत गहराई से स्मरण किया। समाजसेवी प्रासिद्ध व्यवसायी चरण बाबू डालमिया ने संगोष्ठी का शुभारंभ किया। कहा कि स्वर्गीय श्री अनंत देव मिश्र जी मात्र एक साधारण राजनेता नहीं थे, अपितु वे भारतीय राजनीति के तपोवन में एक ऐसे सिद्ध तपस्वी और वटवृक्ष के समान थे, जिनकी सघन छाया और वैचारिक ओज से संपूर्ण राष्ट्र लाभांवित हुआ।

गया जिला कांग्रेस कमिटी के मानुषया नेता गजाधर लाल पाठक ने कहा की अविभाजित गया जिला का कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में उनका कार्यकाल शुचिता, कर्मठता और कर्तव्यनिष्ठा का स्वर्ण युग माना जाता है। उनकी मेधा और दूरदृष्टि का प्रताप इतना प्रखर था कि न केवल बिहार के प्रांगण में, अपितु राष्ट्रीय पटल पर भी उनकी राजनीतिक विद्वत्ता का लोहा माना जाता था। तत्कालीन केंद्र सरकार के शीर्षस्थ कर्णधारों

जिनमें श्रीमती इंदिरा जी, पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष एवं महामहिम राष्ट्रपति डा.शंकर दयाल शर्मा, के डी मालविया, कमलापति त्रिपाठी एच एन बहुगुणा, डी एन तिवारी, हरदेव जोशी, बाबू जगजीवन राम , ललित नारायण मिश्रा,एन डी तिवारी, शीला दीक्षित, जैसे मूर्धन्य राजनेता नेता सम्मिलित थे, वे सभी पं अनंत देव मिश्र जी के कालजयी विचारों की भूरि-भूरि प्रशंसा करते थे। आज भी बड़ी संख्या में नेता कार्यकर्त्ता उनके द्वारा प्रशस्त किए गए मार्ग का पूर्ण निष्ठा से अनुसरण करना अपना परम सौभाग्य मानते है।

इस पावन स्मृति सभा को संबोधित करते हुए भाजपा के वरिष्ठ नेता नेता हरिनारायण त्रिपाठी एवं भारतीय जन क्रांति दल के संस्थापक अध्यक्ष आरडी मिश्रा ने कहा की ऐसे मौके पर प्रेम कुमार जी का उद्गार उनके प्रति श्रद्धा का भाव अनायास याद पड़ जाता है भाजपा के माननीय वरिष्ठ यशस्वी नेता एवं बिहार विधानसभा के सभापति डॉ. प्रेम कुमार से जब भी उनके संदर्भ में चर्चा होती है तो वे अत्यंत गदगद कंठ और कृतज्ञ भाव से अपनी स्मृतियों को साझा करते हुऎ कहते हैं कि स्वतंत्रता संग्राम के अथक सेनानी बिहार के राजनीति में एक सम्मानजनक स्थान प्राप्त करने वाले स्वर्गीय अनंत देव मिश्र हमें पुत्रवत स्नेह देने वाले हमारे राजनीतिक गुरु, मार्गदर्शक और परम आत्मीय अभिभावक निरूपित करते हुए यह आगे कहते हैं, कि उनके स्वयं के सामाजिक, राजनीतिक जीवन की आधारशिला श्री मिश्र जी के ही मार्गदर्शन में रखी गई थी। जनसेवा का गूढ़ ज्ञान, सांगठनिक कौशल और राजनीति का परमार्थ तत्व उन्होंने उसी महामना के सानिध्य में रहकर ग्रहण किया था, जो आज उनके संपूर्ण जीवन का सबसे अमूल्य पाथेय है।

इसी वैचारिक अनुष्ठान को आभासीय विस्तार प्रदान करते हुए बिहार प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ स्तंभ, विधान परिषद के सदस्य पूर्व मंत्री डॉ0 मदन मोहन झा ने भी अपने उद्गार व्यक्त किए। उनका मंतव्य भी पूर्णतः इसी शाश्वत सत्य को रेखांकित करता है कि स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय श्री अनंत देव मिश्र जी का आचरण और उनका संपूर्ण जीवन दर्शन वर्तमान तथा भावी पीढ़ियों के लिए एक ऐसा अनुकरणीय आख्यान है, जो दिग्भ्रमित समाज को सदैव सत्य और निष्ठा का पथ प्रदर्शित करता रहेगा। उनके जीवन की निर्मलता ने अनगिनत राजनीतिक साधकों को सही दिशा बोध कराया है। मैं मानता हूं कि तत्कालीन बिहार के समर्पित बड़े नेताओं में पंडित अनंत देव मिश्र का भी एक नाम कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी। कांग्रेस के प्रति उनकी निष्ठा समर्पण उनका प्रभावकारी व्यक्तित्व तेजस्वी नेतृत्व का ही था फल था की देश के तमाम बड़े कांग्रेस के नेताओं के श्रद्धा पात्र बने रहते थे। मिश्र जी की इमानदारी, व्यापक जन सेवा लोक प्रियता से घबराकर कुछ कुटिल राजनीतिज्ञों को रास नहीं आने के करण उन्हे न तो संगठन में सम्मान जनक स्थान प्राप्त हुआ न हीं संगठन सत्ता में कभी भागीदारी। फिर भी मिश्रा जी के कांग्रेस के प्रति निष्ठा एवं समर्पण में जीवन प्रयन्त कमी नहीं हुई। हमें खासकर आने वाली पीढ़ियों को उनके सद्विचार से प्रेरणा लेनी चाहिए। मैं इस पुण्यतिथि पर हार्दिक श्रद्धासुमन अर्पित कर्ता हूं।

बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठतम नेता प्रोफ़ेसर राम जतन सिंह भी कहा करते हैं की मिश्र जी के सानिध्य में मैने बहुत कुछ सिखा है। उनका दैदिप्यमान चेहरा तेजस्वी नेतृत्व का मैं ही नहीं चाहे राजनीतिक आकाश के मार्तंड ललित बाबू हों, केदार पांडे जी, डॉक्टर जगन्नाथ मिश्रा, बिंदेश्वरी दूबे, भागवत झा आजाद हों या सतेंद्र नारायण सिंह जी सभी लोग उन्हें एक निष्ठावान समर्पित कांग्रेस नेता मानते थे। किंतु उनकी प्रतिष्ठा के अनुकूल कभी पद प्राप्त नहीं हो सका इसका हमें आज भी गम है। फिर भी ऐसे ऐसे त्यागी तस्वी क्षुद्र राजनीतिक षड्यंत्र के लगातर शिकार होते रहे। कांग्रेस के हर बुरे दिनों में खिलाफत करने वाले लोगों को पुरस्कृत किया जाता रहा। ऐसे समर्पित व्यक्तियों को पनीशमेंट दी गई, यही करण है कि कांग्रेस आज मिटती सी नजर आ रही है है।

इस सात्विक श्रद्धांजलि सभा में सम्मानित साहित्यकार राधा मोहन मिश्र माधव, विभिन्न सामाजिक संगठनो से जुड़े डॉ. विवेकानंद मिश्र एवं उद्भट विद्वान आचार्य सच्चिदानंद मिश्र जी ने भी अत्यंत गूढ़, स्वस्थ एवं सारगर्भित शैली में अपने विचार पटल पर रखे। तीनों ही मनीषियों ने स्वर्गीय श्री अनंतदेव मिश्र जी के त्याग, उनकी वैचारिक अखंडता और राष्ट्र के प्रति उनके निस्वार्थ समर्पण की प्रशस्ति का गान किया। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि श्री अनंतदेव मिश्र जी ने अपना संपूर्ण जीवन एक महायज्ञ की भांति जिया, जिसमें उन्होंने अपनी समस्त व्यक्तिगत आकांक्षाओं की आहुति देकर केवल जनकल्याण को ही अपना परमलक्ष्य माना। अंततः इस सभा में उपस्थित प्रत्येक जन ने उस महान आत्मा की पुनीत स्मृति के समक्ष नतमस्तक होते हुए, उनके द्वारा स्थापित किए गए उच्चादर्शों और सत्यनिष्ठ राजनीति के कंटकाकीर्ण मार्ग पर आजीवन अग्रसर रहने का दृढ़ संकल्प लिया। आचार्य मिश्रा जी ने कहा की पंडित अनंत देव मिश्रा का व्यक्तित्व पारसधर्मी था।

     वामपंथी विचारधारा के वरिष्ठ नेता अधिवक्ता याहिया सुमन गिरी अजय मिश्रा आचार्य अरुण कुमार मधुप आचार्य सुनील कुमार पाठक राजीव नयन पांडेय डॉक्टर ज्ञानेश भारद्वाज रणजीत पाठक अमरनाथ पांडे पवन मिश्रा शारदा साहिबा किरण पाठक वीणा कुमारी देवानंद देवर्षी टिंकू कुमार नीलम कुमारी नम्रता ओझा गोविंद बाबू गुपुत प्रेमनाथ टईया राजीव लाल गुर्दा लालू झांगर रमेश जी गायब चंदन धोकड़ी शिवम गौड डॉक्टर जितेंद्र कुमार मिश्र रूबी कुमारी देवेंद्रनाथ मिश्र डॉक्टर दिनेश कुमार डॉक्टर रविंद्र कुमार प्रोफेसर अशोक कुमार मनीष कुमार डॉक्टर शंभू कुमार अरुण ओझा मृदुला मिश्रा शंभू गिरी नीरज वर्मा जितेंद्र कुमार मिश्र दिलीप कुमार दीपक पाठक सुरेश राम गौतम कुमार रंजना पांडे कविता राऊत रोमी कुमारी विश्वजित चक्रवर्ती हरिद्वार मिश्रा फूल कुमारी प्यारी देवी चांदनी कुमारी, सतेन्द्र दूबे के अलावे कई लोगों ने श्रद्धांजलि अर्पित किया।

रिपोर्ट:- प्रियांशु मिश्रा

V9 News
Author: V9 News

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